आज हम राजस्थान की उस लोकसभा सीट का गणित आपको समझाने वाले हैं जिसे बीजेपी के दबदबे वाली सीट कहा जाता है। जी हां,कोटा बूंदी लोकसभा सीट का सियासी समीकरण बताने की कोशिश करेंगे और हर पहलू पर चर्चा करेंगे ताकि आपको इस लोकसभा सीट पर हार जीत का समीकरण समझ आ सके। राजस्थान की शिक्षा नगरी कहे जाने वाले कोटा में फिलहाल ओम बिरला सांसद हैं और ओम बिरला इस वक्त प्रहलाद गुंजल, भवानी सिंह राजावत जैसे अपने ही दल के नेताओं के निशाने पर हैं। ओम बिरला के खिलाफ कुछ संगीन आरोप भी लगे जिनमें महिला उत्पीड़न और सेक्स रैकेट तक चलाने के आरोप लगे। सोशल मीडिया पर ओम बिड़ला के खिलाफ खूब ऑडियो वीडियो मैसेज वायरल हुए लेकिन हमारी पड़ताल में यह सब वीडियो ऑडियो पॉलिटिकली मोटिवेटेड नजर आए। ना ही किसी ऑडियो वीडियो की सत्यता सामने आई। हमने जब पूरे मामले को छाना तो राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और विरोधियों के द्वारा रचे गए इस माहौल में कुछ भी खास नहीं निकल पाया। जिस संगीता माहेश्वरी नाम की महिला का ऑडियो प्रचारित किया गया था उस पर भी स्वयं संगीता माहेश्वरी ने FIR दर्ज करा कर ओम बिरला के खिलाफ चल रहे राजनीतिक माहौल को ठंडा कर दिया। धमचिक.Com कभी भी किसी चीज को एक ही पहलू पर नहीं जांचता है इसलिए अभी तक ओम बिरला पर लगे सभी आरोप हम दुर्भावनापूर्ण पाते हैं। हाडोती संभाग की कोटा बूंदी सीट पर 29 अप्रैल को वोटिंग होनी है। संभाग स्तर पर बात करें तो कोटा संभाग में दो लोकसभा सीट आती है। पहली कोटा बूंदी और दूसरी झालावाड़ बारां। दोनों ही लोकसभा सीटों पर बीजेपी का दबदबा रहा है। कोटा बूंदी में सन 1952 में पहला लोकसभा चुनाव हुआ था जिसमें राजा चंद्रसेन राम राज्य परिषद से पहले सांसद बने थे।1957 का चुनाव यहां बेहद दिलचस्प रहा क्योंकि 1957 में कांग्रेस के ओंकार लाल यहां से सांसद बने और लगातार सन 1977 तक 4 बार सांसद रहे। 1977 में कृष्ण कुमार गोयल ने जनता पार्टी से चुनाव लड़ा और यह सीट अपने खाते में डाल ली। सन 1980 में बीजेपी ने अपने आगाज के साथ ही इस सीट को जीत लिया और कृष्ण कुमार गोयल भारतीय जनता पार्टी से पहले बीजेपी सांसद बने लेकिन 1984 में कांग्रेस के जाने-माने दिग्गज शांति धारीवाल ने फिर यह सीट कांग्रेस को दिलाई। सन 1989 में भारतीय जनता पार्टी से वैद्य दाऊ दयाल जोशी सांसद बने और लगातार तीन बार सांसद रहे। 1998 से पूरे 9 वर्ष तक। यह सीट 1998 में कांग्रेस के राम नारायण मीणा ने जीती जो इस बार कांग्रेस के फिर से प्रत्याशी हैं। रामनारायण मीणा उस वक्त महज एक वर्ष सांसद रह पाए और साल 1999 में रघुवीर सिंह कौशल ने बीजेपी कैंडिडेट के रूप में यह सीट जीती। 2009 में कांग्रेस के इज्यराज सिंह ने यह सीट जीती। इज्यराज बाद में भाजपा में शामिल हो गए। ओम बिरला 2014 से अब तक यहां के सांसद हैं और इस बार बीजेपी से प्रत्याशी हैं तो सामने कांग्रेस के प्रत्याशी पूर्व सांसद रामनारायण मीणा है। अब तक के 16 चुनावों में 7 बार कांग्रेस और 7 बार ही बीजेपी ने जीत दर्ज की है बाकी एक बार जनसंघ की रामराज्य परिषद और एक बार जनता पार्टी ने कोटा फतेह किया। यह लोकसभा क्षेत्र 8 विधानसभा क्षेत्रों से मिलकर बना है जिनमें कोटा उत्तर,कोटा दक्षिण, सांगोद, लाडपुरा, पीपल्दा, रामगंज मंडी, बूंदी और केशव राय पाटन विधानसभा सीटें हैं। सत्तारूढ़ प्रदेश सरकार कांग्रेस की है फिर भी पिछले विधानसभा चुनाव 2018 में कोटा ने 8 सीटों में से 5 में बीजेपी के विधायक बनाए हैं। 2013 में कोटा की आठों सीट बीजेपी के पास थी। हालांकि 2008 में कांग्रेस बीजेपी 4-4 सीटों की बराबरी पर थी। 2014 में 12 उम्मीदवार चुनाव में उतरे थे और 17 लाख 44 हजार 539 वोटर थे जिनमें 6 लाख 44 हजार 822 वोट अकेले ओम बिरला को मिल गए थे।उनके सामने सिर्फ कांग्रेस के इज्यराज सिंह ही नहीं थे बल्कि आम आदमी पार्टी के अशोक कुमार जैन और बहुजन समाज पार्टी के अशोक कुमार भी थे।ओम बिरला ने इज्यराज सिंह को 2 लाख 782 वोट जो कि 17.58 मत प्रतिशत है, के बड़े अंतर से हराया था। उस वक्त इस सीट पर 66.26 फीसदी मतदान हुआ था। अब कोटा के जमीनी हालात समझे और साथ में यह भी कि कोन इस वक्त यहां से जीत सकता है। शहरी क्षेत्र में कोटा पूरी तरह से मोदी और भगवा रंग में रंगा हुआ नजर आ रहा है पर ग्रामीण इलाकों में सड़क, पानी, बिजली के पुराने मुद्दे हैं लेकिन ग्रामीण वर्ग भी बीजेपी के प्रभाव से बचा नहीं है। ओम बिरला दो बार विधायक भी रहे हैं इसलिए उनके पास कोटा दक्षिण का मजबूत वोट बैंक बैकअप में है। साथ ही अन्य सीटों पर भी बीजेपी मजबूत है। हालांकि लाडपुरा से टिकट कटवा चुके भवानी सिंह राजावत, प्रहलाद गुंजल और पीपल्दा की टिकट कटवा चुके विद्याशंकर नंदवाना अब पूरी तरह ओम बिरला के खिलाफ हैं और तीनों ही पूर्व विधायक हैं जो अपने विधानसभा क्षेत्रों में ओम बिरला के खिलाफ काम करेंगे। कांग्रेस के पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष रह चुके राम नारायण मीणा का ज्यादातर समय बूंदी जिले में ही बीता है इसलिए उनकी कोटा की सियासत से दूरी है और बीजेपी के ओम बिरला ने सांसद के तौर पर सफलता हासिल की हैं। राम नारायण मीणा को शांति धारीवाल और भरत सिंह जैसे नेताओं के सपोर्ट की खासी जरूरत कोटा में पड़ेगी और वह कितना मिल पाएगा अभी पता नहीं है। एक और दिलचस्प बात कोटा दक्षिण, रामगंज मंडी,बूंदी केशव रायपाटन और लाडपुरा विधानसभा सीटें बीजेपी के पास है तो राम नारायण मीणा को बूंदी में भी मेहनत करनी पड़ेगी। 5 साल में ओम बिरला की लोकसभा उपस्थिति 87 फीसदी रही है। साथ ही 164 डिबेट्स में हिस्सा लिया है। शायद वह प्रदेश से सर्वाधिक 654 प्रश्न पूछने वाले सांसद हैं। ओम बिरला अपने मैनेजमेंट के लिए पूरे प्रदेश में विख्यात है। अभी तक ओम बिरला के सामने कोई भी दूसरा प्रत्याशी किसी भी दल से कोटा जीतता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि मैनेजमेंट के माहिर ओम बिरला के सामने अपनो से ही पर पाने की चुनौती जरूर है।

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