सुप्रीम कोर्ट ने आज रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड के चेयरमैन अनिल अंबानी को चार सप्ताह के भीतर एरिक्सन को 453 करोड़ रुपये चुकाने को कहा है। कोर्ट ने कहा गया है कि अगर पैसे नहीं चुकाए तो अनिल अम्बानी को तीन महीने के लिए जेल भेज दिया जाएगा। अन्य दो डायरेक्टर रिलायंस टेलिकॉम चेयरमैन सतीश सेठ और रिलायंस इंफ्राटेल चेयरपर्सन छाया विरानी को भी कोर्ट ने अनिल अम्बानी के साथ कोर्ट ने दोषी पाया हैं। पहले ये पूरा विवाद क्या है वो जान लीजिए:- एरिक्सन ने 2014 में आरकॉम का टेलीकॉम नेटवर्क संभालने के लिए 7 साल की डील की थी। उसका आरोप है कि आरकॉम ने 1,500 करोड़ रुपए की बकाया रकम नहीं चुकाई। पिछले साल दिवालिया अदालत में सेटलमेंट प्रक्रिया के तहत एरिक्सन इस बात के लिए राजी हुई कि आरकॉम सिर्फ 550 करोड़ रुपए का भुगतान कर दे। सुप्रीम कोर्ट ने आरकॉम को 15 दिसंबर तक भुगतान करने के आदेश दिए थे। उसने पेमेंट नहीं किया। इसलिए एरिक्सन ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी।

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सुप्रीम कोर्ट ने 23 अक्टूबर को आरकॉम को कहा था कि वह एरिक्सन कंपनी को 15 दिसंबर तक 550 करोड़ रुपए की बकाया राशि का भुगतान करे। अगर रकम चुकाने में देरी होती है तो सालाना 12% ब्याज भी देना होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पूरा करने में नाकाम रहने पर एरिक्सन कंपनी ने अवमानना याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उक्त याचिका पर अनिल अंबानी को नोटिस जारी कर उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा था।  सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी को अवमानना का दोषी भी ठहराया है। अंबानी सहित छाया वीरानी और सतीश सेठ पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट का कहना है कि जुर्माना एक महीने के भीतर भरें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो एक महीने की जेल होगी।

रिलायंस कम्युनिकेशन (आरकॉम) के चेयरमैन अनिल अंबानी के खिलाफ दायर की गई अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 14 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। 550 करोड़ रुपये का बकाया नहीं चुकाने की वजह से स्वीडिश कंपनी एरिक्सन ने अनिल के खिलाफ अदालती अवमानना का मुकदमा कर रखा है। एरिक्सन के वकील दुष्यंत दवे ने कहा था, “बकाया राशि चुकाने तक अनिल को हिरासत में लिया जाना चाहिए। ये अवमानना का साधारण केस नहीं है बल्कि एक असाधारण मामला है।”  दवे ने कहा था, “उनके पास राफेल में निवेश करने के लिए पैसा है लेकिन वह अदालत (550 करोड़ रुपये का भुगतान) में जताई गई प्रतिबद्धता का सम्मान नहीं करना चाहते।” उन्होंने कहा कि ये राजाओं की तरह रहते हैं। ये सोचते हैं कि ये मानवता के लिए भगवान द्वारा दिए गए उपहार स्वरूप हैं। इनके पास रफाल में निवेश के लिए पैसा है, लेकिन हमारा बकाया चुकाने के लिए पैसा नहीं है। ये कोर्ट के आदेशों का मान नहीं रखना चाहते।
दवे ने कहा था कि आरकॉम ने अगस्त 2018 में स्टॉक एक्सचेंज को बताया था कि उसने जियो फाइबर और दूसरी आधारिक संरचना को बेचने का सौदा 5,000 करोड़ रुपये में तय किया है और उसी दिन उसके शेयर प्राइस में 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। उन्होंने अदालत को बताया कि स्पेक्ट्रम और मोबाइल टावर बेचने से कंपनी को 18,100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फायदा मिला। उन्होंने कहा, ‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक असाधारण शख्स है जिसे देश के बेहतरीन सलाहकार और बेहतरीन वकील अपनी सलाह दे रहे है। इन्होंने कोर्ट के आदेशों की जानबूझकर अवमानना की है। इनपर कार्रवाई की जानी चाहिए।’


दवे ने आगे कहा कि अंबानी पहले दिन से वह कोर्ट से किए गए वादे को पूरा नहीं करना चाहते हैं। आपके पास कई हजार करोड़ रुपये की निजी संपत्तियां हैं और आपको अपना वादा पूरा करना पड़ेगा। वह बादशाहों की तरह रहते हैं लेकिन वादे को पूरा नहीं करना चाहते।’ उन्होंने कहा कि समूह के पास पैसा है क्योंकि उसका कहना है कि यदि एरिक्सन अपनी याचिका वापस ले लेता है तो वह उसे पैसा लौटाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि देनदार बैंक अनिल अंबानी की कंपनी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।  आरकॉम के वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत में जवाब दाखिल कर कहा था कि एरिक्सन के 550 करोड़ रुपये के बकाया कर्ज का भुगतान नहीं कर कंपनी ने किसी प्रकार की अवमानना नहीं की है। रोहतगी के मुताबिक, एरिक्सन का बकाया इसलिए नहीं चुकाया गया, क्योंकि आरकॉम का रिलायंस जियो के साथ स्पेक्ट्रम बिक्री का सौदा टूट गया।अब यदि अम्बानी अपना ये कर्ज चुका देते हैं तो जेल जाने से बच जाएंगे।

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