सीबीआई जांच की मांग करने वाले इस आंदोलन से जुड़े तकरीबन हर नेता को सीबीआई ने आंदोलन का दोषी माना है।

राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन में 3 साल पहले एसओजी ने गैंगस्टर आनंदपाल काे 24 जून 2017 काे चूरू के मालासर में एक एनकाउंटर में मार दिया था। पूरे राजस्थान और दीगर कई और स्टेट्स में इस एनकाउंटर को लेकर काफी हंगामा हुआ। राजपूत समाज ने आनंदपाल एनकाउंटर पर जमकर बवाल किया और उग्र आंदोलन किये। समाजिक दवाब में बीजीपी की वसुंधरा सरकार को बाद में इसपर सीबीआई जांच बैठानी पड़ी। बीजेपी सरकार के आग्रह पर सीबीआई ने 5 जनवरी 2018 को इस मामले की जांच शुरू की लेकिन अब जब सीबीआई की ये जांच पूरी हो गयी है।

अब एक नया हंगामा खड़ा हो गया है और सीबीआई जांच की मांग कर रहा राजपूत समाज ही अब जांच के बाद आये नतीजों का शिकार हो गया। सीबीआई जांच की मांग करने वाले इस आंदोलन से जुड़े तकरीबन हर नेता को सीबीआई ने आंदोलन का दोषी माना है। सीबीआई ने अब आनंदपाल एनकाउंटर को सही बताते हुए एसीजेएम (सीबीआई केसेज) कोर्ट में एफआर पेश कर दी है। एफ आर पेश करते हुए सीबीआई ने पुलिस द्वारा किये इस एनकाउंटर को सही माना है जबकि एनकाउंटर के बाद भड़के दंगों के लिए आनंदपाल की बेटी सहित राजपूत समाज के 24 नेताओं व अन्य लोगों के खिलाफ शनिवार को चार्जशीट पेश की है।

इनमे जिला नागौर (राजस्थान) के गांव सांवराद में कथित हिंसा व दंगों से संबंधित इस मामले में सीबीआई ने एसीजेएम (सीबीआई मामले) जोधपुर की अदालत में दाखिल आरोप पत्र में आनंदपाल सिंह की बेटी चरणजीत सिंह उर्फ चीनूऔर राजपूत समाज के बड़े नेता लोकेंद्र सिंह कालवी और सुखदेव सिंह गोगामेडी सहित 24 लोगों को दंगा भड़काने, तत्कालीन नागौर एसपी (महिला आईपीएस) पर जानलेवा हमला करने और पुलिस वाहनों को जलाने का भी दोषी माना है। इसमें करणी सेना सुप्रीमो लोकेन्द्रसिंह कालवी, सुखदेव सिंह गोगामेड़ी, राजेन्द्र गुढ़ा जैसे बड़े नाम भी है।


क्या हुआ था उस रात ….

बेहद चर्चित आनंदपाल एनकाउंटर 24 जून 2017 काे हुआ था जिस रात ये एनकाउंटर किया गया उस दिन अमावस्या की रात थी। पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के द्वारा किये गए इस एनकाउंटर को फर्जी बताया गया और बाद में इसकी सीबीआई जांच की मांग हुई और तक़रीबन 14 महीने बाद सीबीआई ने 11 अगस्त 2018 काे अमावस्या की रात काे 11 बजे से 11:30 बजे के बीच आनंदपाल एनकाउंटर की लोकेशन पर इसी सीन को रिक्रिएट किया। सीन के दौरान सीबीआई ने उसी अंदाज में फायरिंग की , जिस तरह से पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने की थी।

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पुलिस के अनुसार आनंदपाल को अमावस की उस रात को एक शीशे में एक ऐंगल से देखकर टारगेट लोक करके शूट किया गया था लेकिन अमावस किये रात और शीशे में देखकर किया गया एनकाउंटर लोगों को हजम नहीं हुआ और पुलिस की प्रतिष्ठा पर सवालिया निशान लगे। लोगों ने पुलिस की ऑपरेशन की शैली को फर्जी बताया और इस कहानी पर राजपूत यकीन नहीं कर पाए इसलिए सीबीआई ने जांच के समय उसी तरह से शीशे के टुकड़े में आनंदपाल के डमी को देखकर मामला समझा। उसे एनकाउंटर लोकेशन की सीढ़ियाें से देखा , जैसा एसओजी ने एनकाउंटर के दाैरान किया गया था।

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सीबीआई ने अपनी जांच में यह माना कि एनकाउंटर लोकेशन के मकान की पहली मंजिल पर कमराें केे सामने आनंदपाल काे देखने की कहानी सच हौ। सीढ़ियाें से आनंदपाल को शीशे की सहायता से देखा जा सकता है। इसके अलावा सीबीआई ने ये भी जांच की कि एनकाउंटर के दौरान 59 पुलिसकर्मियाें और अधिकारियाें में से 27 ने आनंदपाल पर 177 राउंड फायर किए थे। सीबीआई ने फायरिंग करने का ये सीन भी रिक्रिएट किया और जांच के बाद माना कि आनंदपाल का एनकाउंटर रियल था। सीबीआई की जांच से ये भी खुलासा हुआ कि फायरिंग के दौरान आनंदपाल पर सबसे ज्यादा 30 राउंड फायर कमांडाे साेहन सिंह ने किए थे।

वही सोहन सिंह को भी आनंदपाल की गोली लगी। सीबीआई ने सीएफएसएल रिपोर्ट की जांच करके पता लगाया कि सोहन सिंह को लगी गोली आनंदपाल सिंह की एके 47 से चली थी। साथ ही उस वक्त चूरू जिला एस.पी. राहुल बारहठ ने अपनी एके 47 से दाे राउंड फायर किए, तत्कालीन थाना प्रभारी राजवीर सिंह ने भी दाे, कुचामन सिटी सीओ विद्याप्रकाश ने 3, एसओजी में इंस्पेक्टर सूर्यवीर सिंह ने अपनी ग्लाेक 9 एम एम पिस्तौल से गैंगस्टर आनंदपाल पर सात राउंड फायर किए थे।

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सीबीआई ने ये भी पता लगाया है कि आनंदपाल की अडवांस्ड कलाश्निकोव राइफल लोडेड मिली, एनकाउंटर के बाद जांच में एसओजी को आनंदपाल पास में नाइट्राइट भी मिला जिसके आधार पर सीबीआई ने आनंदपाल को फायरिंग का दोषी भी पाया। सीबीआई ने फोरेंसिक के लिए पूरे एनकाउंटर में उपयोग हुए हर हथियार को सेंट्रल फाेरेंसिक लैब में भेजा। सेंट्रल फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट ने पुलिस की बातों को पुख्ता कर दिया कि कमांडाे साेहन सिंह के शरीर से निकाली गई गाेली आनंदपाल की कलाश्निकोव से ही चली थी।


सीबीआई ने आनंदपाल के हाथों से लिये गए ग्रैंशॉट के अवशेषों को जो कि पुलिस द्वारा पहले ही लिए जा चुके थे हैंडवाश का ये सैम्पल सीएफएसएल में जांच के लिए भेजे थे। इसमें भी काउन्टर अटैक आनंदपाल द्वारा किये जाने की पुष्टि हो गयी। सीबीआई ने मुठभेड़ मामले में बहुत सारे राजपूत संगठनो को बुलवाया पर कोई भी पुलिस के एनकाउंटर को फर्जी साबित नहीं कर पाया। इसके अलावा मामले में जिन राजपूत संगठनाें ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर मामले की जांच सीबीआई से कराने काे कहा था, उनमें से कई बयान देने ही नहीं पहुंचे। कुछ संगठन बयान देने पहुंचे, लेकिन वे सीबीआई काे ऐसा काेई सबूत नहीं दे सके।

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सीबीआई ने पुलिसकर्मियों की भी जांच की  सीबीआई के  अधिकारी पुलिस उपाधीक्षक सुनील सिंह व उनकी टीम ने एनकाउंटर में शामिल सभी 59 पुलिस वालों के बयान लिए जांचजांच के लिए उनके माेबाइलों की लाेकेशन निकलवाई, कॉल रिकॉर्ड जांची। सीबीआई ने पाया कि सभी पुलिस वाले एनकाउंटर के वक्त 24 जून 2017 मालासर में मौजूद थे । इसके अलावा एसओजी के जो पुलिसकर्मी 21 जून से हरियाणा के सिरसा के शेरपुरा में मौजूद थे उनकी लाेकेशन भी 21 जून से हरियाणा के सिरसा में ही थी। कुल मिलाकर सीबीआई ने फाइनल रिपोर्ट पेश कर दी है और अब इस मामले में तो पुलिस सही साबित हुई लेकिन 24 राजपूत नेताओं पर एक गाज पड़ी है जिसके बाद राजपूत अब सीबीआई पर भी सवाल उठा रहे हैं।

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