दोस्तों आज हम आपको बताएंगे कि यह जो सदियों से भूत का बवाल दुनिया की नजरों को पागल बनाए हुए हैं। असल में यह है क्या। क्या सच में भूत जैसी कोई चीज है या यूं कहिए कि लोगों को इसके नाम पर इन बाबा तांत्रिकों ने पागल बना रखा है।

अब धमचिक टीम ने यह सोचा कि क्यों ना इसकी सच्चाई तक आपको पहुंचाया जाए बस यह सब जानने के लिए आपको हमारे आर्टिकल को पूरा पढ़ना पड़ेगा । दोस्तों मनोविज्ञान में एक बीमारी होती है । सीजोफ्रेनिया नाम तो सुना ही होगा और अगर नहीं सुना तो हम आपको बता देते हैं यह वही बीमारी है जो लगे रहो मुन्ना भाई में मुन्ना को हो गई थी। जब वह गांधीजी से बातें करने लगा था ।

अब जब कोई आदमी इस तरीके से हवा में बातें करेगा तो आपको तो यही लगेगा ना कि भाई या तो यह पागल हो गया है या इसे कोई भूत दिखने लग गया। अब यह भूत का चक्रव्यूह तोड़ने के लिए हमने यह धमचिक आर्टिकल लिखा है दोस्तों यह बीमारी होती है मनोविज्ञान से संबंधित या यूं कहिए साइकेट्री से। मनोविज्ञान को ही इंग्लिश में साइकेट्री कहते हैं भाई। अब आपको तो पूरी जानकारी देनी पड़ेगी ना।

इस बीमारी का नाम सीजोफ्रेनिया एक विज्ञानिक यूजीन ब्लयूर ने दिया था। दोस्तों इस बीमारी में आपके दिमाग में केमिकल लोचा हो जाता है अब आप यह कहेंगे कि भाई यह तो हमें लगे रहो मुन्नाभाई में राजकुमार हिरानी ने बता दिया था। रुको तो सही यार हम धमचिक हैं तो कुछ और अंदर की बात बताएंगे भाई उस केमिकल का नाम होता है डोपामीन

इसी डोपामिन का लेवल इस बीमारी के अंदर बढ़ जाता है। जिसकी वजह से मरीज के दिमाग में कुछ लोचा हो जाता है और उसे कुछ ऐसे चित्र दिखने लगते हैं जो कि बिल्कुल रियल 3D इमेज होती है। जिसमें उसे लगता है यह जो दिख रहा है यही सच्चाई है और उसी के इर्द-गिर्द उसकी दुनिया घूमने लगती है।

अरे भाई अब भी नहीं समझे तो कंगना राणावत वाली जो वो लम्हे फ़िल्म आई थी। उसमें भी कंगना को भी यही बीमारी थी ।

यह सब होने के साथ-साथ मरीज को आवाज भी आती है। जिससे उसे लगता है कोई भूत-प्रेत उसे बुला रहा है या किसी दूसरे को ऐसा लगता है जब वह हवा में बातें करता है। असल में होता यह है कि उसके दिमाग में डोपामिन का लेवल बढ़ जाता है और यह आवाजें किसी इंसान की आवाज का आभास होती है और हम लोग इन सब को भूत-प्रेत का नाम दे देते हैं और बेचारे मरीज को ले जाते हैं तांत्रिक बाबाओं के पास।

जहां मरीज को इलाज की आवश्यकता होती है हम ऐसे लोगों की और परेशानी बढ़ा देते हैं इनको इन बाबाओं के पास धकेल कर ।

बीमारी से पीड़ित मरीज़ को सही समय पर इलाज मिले तो वह ठीक हो जाते हैं ।इसके उदाहरण हमारे पास मौजूद हैं ।दोस्तों ऐसे ही एक इंसान थे जॉन नेश इनका जन्म 13 जून 1928 को हुआ था और उनका देहांत 23 मई 2015 को। दोस्तों ये अमरीकी मथेमैटिशन थे । इनको भी यही बीमारी थी ।इनको तो एक नहीं दो नहीं तीन तीन भूत या यूं कहिए तीन तीन इंसान एक साथ दिखते थे ।

शुरू में जब इन्होंने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से अपनी शुरुआत की तो लोगों को यह देखकर बहुत अजीब लगा कि यह इंसान किस से हवा में बातें करता रहता है। नेश को लगता है कि जो लोग Red tie पहन के घूम रहे हैं यह सब लोग कम्युनिस्ट है और उनके खिलाफ साजिश रच रहे है| इसका पता लोगो को तब चला जब हाइपोथिसिस पर सेमिनार रिप्रजेंट करना था लेकिन वहां पर जो नेश की अजीबोगरीब हरकतें देखकर उनके दोस्तों को लगा कि नेश के साथ कुछ गड़बड़ है।उनको मैक्लीन हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया।

वहां पर पैरानॉयड सिजोफ्रेनिया नामक बीमारी से उनके ग्रसित होने का पूरा पता चला ।लेकिन इसके बाद इनका इलाज चला फिर नेश ने धमचिक कमाल करते हुए नोबेल प्राइज जीता है ना कमाल की बात कर दिया ना निशब्द आपको हमने। अगर किसी को ऐसे लक्षण दिखाई देने लगे अपने देश के अंदर तो लोग इसका सीधा सीधा कारण भूत प्रेत को ही मानते हैं और इनको राम रहीम जैसे बाबाओं के पास ले जाया जाता है और इंसान के ठीक होने की जो भी उम्मीद होती है ।वह भी पूरी तरह खराब हो जाती है।

दोस्तों इस बीमारी इसके साथ मरीज अपने आप को दुनिया से अलग कर लेता है और उसकी दुनिया सिर्फ यह झूठी सच्चाई के आसपास तक ही सीमित रह जाती है। धीरे-धीरे मरीज अवसाद डिप्रेशन उदासी और अनेक प्रकार के लक्षणों से भी ग्रसित हो जाता है जो अपने आप में ही मरीज के लिए काफी खतरनाक है ।

इस समय हर 10000 लोगों पर करीब 1 से 5 मरीज़ सिजोफ्रेनिया के मिल जाते हैं जो अपने आप में ही अच्छी खासी संख्या है। दोस्तों आप और हमारी यह जिम्मेदारी है कि इस तरह के लक्षण वाले लोगों को जब भी हम देखें तो हम उनकी समस्या को समझे ना कि उनको भूत प्रेत से जोड़ दें।

 

Story by:- Barood